रेणु की तरह कृष्णा जी अपने उस जमाने की उपज हैं जिसकी मिट्टी और पानी से उनका जीवन सजा-संवरा है. यह कृतज्ञता इतनी गहरी है कि वे बार-बार उसका कर्ज चुकाने को उद्यत जैसी रहती हैं, ठीक रेणु की तरह.
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