दाहिया जी को यह सम्मान पारंपरिक बीजों के संरक्षण और उनकी खेती के विस्तार को प्रोत्साहन देने के लिए मिला है. वे पिछले पंद्रह सालों से देसी बीजों की तलाश में पूरा देश घूम चुके हैं. बाबूलाल एक साथ दस काम ओढ़े हुए चलते हैं.
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